उस एक समय में

अक्सर उस एक समय में
आंखें बंद कर
बीते हुए लम्हों को
जो दिन भर मेरे
साथ रहे थें उन्हें
समेटने की कोशिश करना
अच्छा लगता है

अक्सर उस थके हुए
समय मे शाम को
पहाड़ों से नीचे उतरते
खिड़की से झांकते
डूबते हुए सूरज की
मद्धम पड़ती रोशनी में
उस ताप को महसूस करना
जो दिन के उजाले में
उसने दिया था
अच्छा लगता है

अक्सर ढलते हुए शाम में
आंखें बंद कर
उसके उष्मा को आंचल में
समाहित करने की कोशिश करना
और उष्मा को जल बिंदु में
बदलते हुए कल्पना करना
अच्छा लगता है

अक्सर उस ढलते हुए
सूरज को क्षितिज में
समाते हुए महसूस करना
उत्सव सा लगता है

उसी एक वक्त में
संकुचित होते सूरज के साथ
उदास, मौन आकाश के
आंखों में झांकते हुए
तुम अकेले नहीं
मैं हूं तुम्हारे पास,
कहना अच्छा लगता है ।

-अपर्णा विश्वनाथ 🍁







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