गॉगल्स


-अपर्णा विश्वनाथ

लायब्रेरी से निकली तो याद आया कि घर में सब्जी नहीं है तो लगा चलो रास्ते में ही बाजार पड़ता है लेती चलूं।
ओह! कितनी धूप है। बारिश की धूप भी ना उमस भरी हालत खराब कर देती है। धूप सीधे मुंह पर पड़ रहा है।पसीना पोंछते हुए मैंने गाड़ी स्टार्ट की और चली गॉगल आंँखों में चढ़ा।
बाजार के पास ही गाड़ी पार्क की और सब्जी खरीदने लगी। ढेर सारी सब्जियाँ लेते हुए वापस हो ही रही थी कि कोने में एक महिला खट्टा भाजी (अमाडी भाजी) और भी अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है का ढ़ेर लिए बैठी दिखी।
सोची चलो पूछ लूं क्या भाव दे रही है।
कैसे ??
दस के दो झुड़ी।
तीन दे दो।
ले लो।
मैं दस रुपए दी और तीन झुडी ले ली।
अपने गाड़ी की ओर रवाना हुई।
जाने क्यों हर कोई मेरी थैली की ओर देख रहे थे।
घर आते शाम हो चुकी थी।
पड़ोस में एक ने कहा — भाजी खाने के लिए लाए हो ?
उनके पूछने में मानो कोई खास कारण या व्यंग्य हो।
मैंने सहजता से कहा हाँ हाँ अमाडी की सब्जी, दाल,चटनी सब तो अच्छी लगती है।
घर के अंदर आई। घड़ी, पर्स, गॉगल को अपने अपने जगह पर रख थैली को कोने में पटकी। फिर ड्रेस चेंज की हाथ पैर धोकर फ्रेश हो गई।
उहं—चलो अब सब्ज़ियां धो लूं।
जैसे ही थैली से भाजी निकाली। आँखों को जैसे चार सौ चालीस का झटका सा लगा।
हें ऐसा कैसे हो सकता है?
यह तो बिल्कुल हरी हरी थी जब मैं खरीदी थी।
इतनी पीली इतनी जल्दी कैसे हो सकती है?
ओह ! तभी लोग अजीब से देख और पूछ भी रहे थे।
लेकिन मैंने तो अच्छी और हरी भाजी ही खरीदी थी।
मामला कुछ समझ नहीं आ रहा था।
गुत्थी तो मगर सुलझानी पड़ेगी। कुछ सोचते हुए मैं वापस अपना गॉगल् आँखों पर चढ़ाती हूं।
लो हो गया मामला साफ।
याद आया भाजी खरीदते वक्त मैंने गॉगल नहीं उतारा था। जिसके कारण हल्की पीली पड़ी भाजी भी ताज़ी हरी-हरी दिख रही थी।
हम्म्—यह माजरा है। अगली बार गॉगल उतार कर भाजी खरीदना समझी अपर्णा !
चलो गाय खोजूं नहीं तो फेंकने में जाएगा।
यह तो भाजी थी फेंक सकते हैं। लेकिन उनको कैसे फेंक निकालें अपनी जिन्दगी से जिस पर आपने विश्वास का गॉगल्स पहन दोस्ती की थी कभी और बाद में रंग बदल गए। कभी-कभी हमारी आँखों को धोखा हो ही जाती है देखने-सुनने और पहचानने में चाहे वह सब्जी-भाजी हो या इंसान।

-अपर्णा विश्वनाथ

2 thoughts on “गॉगल्स

  1. अत्यंत रोचक अनुभव। बहुत कुछ सिखाती है ये कहानी और आपका लेखन भी पाठक को बांध कर रखता है।

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s