12 thoughts on “सुनें हे!पृथ्वीराज,चंद्रगुप्त और सभी 🌺

  1. पहले 1 मिनट में ही इसने गलत बोल दिया।
    देश के टुकड़े राजाओं के प्रति निष्ठा और चुप्पी ने नहीं, गोल गोल हवा हवाई बातें करना और सत्य से दूर भागने से हुआ है। ब्लकि बप्पा रावल, महाराणा प्रताप, शिवाजी महाराज जैसे राजाओं से देश इतना सुरक्षित रहा।
    इसमे स्वयं में साहस नहीं ये देश के टुकड़े होने का सही कारण बता सके। बस तुकबन्दी में गोल गोल घुमाता रहेगा।

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    1. इतिहास में इनके अलावा कुछ जयचंद भी तो रहें हैं। अब समझदार को इशारा ही काफी। निष्पक्ष और तटस्थ रह कर कम-से-कम सही कह तो रहे हैं कवि महाशय। इतिहास और राजनीति में अगर सबकुछ सही रहता तो आज धृतराष्ट्र का ससुराल और आसपास के देश भारत का ही हिस्सा रहते।

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      1. जयचंद और मीर जाफर को गलत बदनाम किया जाता है। वो पूरा इतिहास ही गलत पढ़ाया गया है। असली दोषी तो अकबर, सिराज उद दौला जैसे थे।
        वैसे गंधार, करांची फिर से भारत में आ सकता है। पर वैसा आपको करना है तो भारत से शुरुआत करनी होगी। और बहुत से बड़े और “secularism” के विरुद्ध जा कर हिन्दू हितों पर कार्य करना होगा। जब वो बात आएगी तो यही कवि उन जैसों को गालियां देगा सर्व धर्म समभाव के नाम पे।

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          1. आज से सौ वर्ष पूर्व गांधी के खिलाफत आंदोलन में कूदने से इसकी नीव पडी। फिर अंग्रेजों की सहायता से गांधी सबसे बड़ा नेता बन गया। उसने मोपिल्ला हिन्दू नरसंहार में भी हिन्दुओं को ही दोषी ठहराया। इस बात में कोई संदेह नहीं कि गोडसे ने 1945 के पहले गांधी वध किया होता तो आज का भारत बहुत बड़ा होता, सम्पूर्ण कश्मीर भारत में होता और शयद सिंध और बांग्लादेश के भी बड़े हिस्से भारत में होते। गांधी ने ही कॉंग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को विभाजन के लिए मनवाया था। नेताजी के कर्मों का फल और पद की प्राप्ति गांधी, अंग्रेजों के गुलामों को प्राप्त हुई और प्रकार राष्ट्रवादी नेता जैसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी हाशिये पर चले गये और मरवा दिए गए। फिर भी गांधी वध से हैदराबाद पाकिस्तान बनने से बच गया क्यों कि गांधी कभी भी सैन्य बल के प्रयोग के लिए तैयार नहीं होते।

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