सावधानी हटी दुर्घटना घटी

सुबह सुबह का समय साँस लेने की भी फुर्सत नहीं मानो। किचन, खाना, टिफिन किसी की चाय किसी की कॉफी और भी कुछ कुछ। नौ बजने को थे महाशय जूते पैर में डालते हुए पूछ रहे… टिफिन पैक हो गया कि नहीं ?
हाँ हाँ मैं दौड़ते हुए उन्हें टिफिन बैग देती हूं।
टाइम हो गया है और यह बारिश भी अभी स्टार्ट होनी थी।
उम… जल्दी जल्दी रेनकोट  पहन नीचे उतर गाड़ी स्टार्ट करते हैं। आज गाड़ी भी मानो मानसुनिया गई है।
चलो बाय।
ओह शुक्र है…
बाय…
मैं वापस अपने किचन में बचे हुए कामों को समेटने में व्यस्त।
चलो एक कप कॉफी पी लूं। इसी बहाने साँस ले लूं और एक नज़र आज की खबर पर भी ।
अरे यह क्या ?
चश्मा टी. वी. के पास ?
लगता है हड़बड़ी में भूल गए?
परेशानी तो होगी ही। फोन लगाऊँ क्या ?
नहीं नहीं बारिश हो रही है । रास्ते में होंगे। ड्राइव कर रहे होंगे!
कुछ देर बाद काॅल लगाती हूं।
दिमाग में इन्हीं सब बातों का बवंडर चल रहा था। चश्मा अंदर डायनिंग टेबल पर रख वापस किचन में मैं ब्लूटूथ स्पीकर में बोडो लोकोर बेटीलो…
लोंबा लोंबा चूल..
ऐमोन मथाए बांधिए दिलो लाल गेंदा फूल…
गाना लगाके काम में व्यस्त हो गई।
कुछ देर हो गई ऑफिस पहुंच गए होंगे। चलो फोन करके चश्में के बारे में बता दूं। फोन लगा लेकिन आवाज घरघरा रही थी।
इधर देखती हूं डायनिंग टेबल पर चश्मा नहीं।
आँखें बड़ी बड़ी कर मैं इधर उधर चश्मा ढूंढने लगी।
इधर ही तो रखी थी क्या ?
कहाँ गई ?
ओह शायद चश्मा ऐ भूले ही नहीं साथ ले गए।
नहीं तो कहाँ जाएगी।
दिमाग थोड़ा डिस्ट्रैक्ट हुआ।
फिर कुछ देर बाद मैंने इन्हें काॅल किया।
चश्मा …
हाँ हाँ…
मैं आया और ले गया था।
कब ?
कैसे?
मुझे आवाज तो देना था जब आए थे?
और ऐसे कई प्रश्नों की झड़ी।
कोई जवाब नहीं उधर से
ओओओ… फोन काट दिया।
हम्म्म… चलो तसल्ली हुई। चश्मा सचमुच भूले थे और अब उनके पास भी है।
फिर भी आने दो बताती हूं।
रात घर आते हैं महाशय…
क्योंजी कब आए और बिना बताए चुपचाप चश्मा उठाए चल दिए। ऐसा कोई करता है क्या ?
यह भी इस बार चुप नहीं रहें।
बोडो लोकोर बेटीलो…
लोंबा लोंबा चूल..
ऐमोन मथाए बांधिए दिलो लाल गेंदा फूल…ऐ चल रहा था फुल साउंड में। तीन बार आवाज लगाया मैंने, लेकिन तुम थी कि अपनी ही धुन में। फिर क्या लेट तो पहले ही हो गया था। फटाफट चश्मा ले चला गया मैं।
मैं सोचती रह गई। हे भगवान! पर्स में रूपए, मोबाइल, घड़ी सभी चीजें तो यहीं पड़ी रहती है। कोई तीसरा उठा ले जाए तो भी शायद मुझे सुध न होती।
गलती मेरी ही है। कोई न हो तो घर बंद कर काम करना चाहिए।
फिर लाख गाने भी सुनते रहो।
छोटी साधारण घटना ही सही हमें बड़ी बातें समझा जाते हैं।
सावधानी हटी दुर्घटना घटी

-अपर्णा विश्वनाथ

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