पामुलापति वेंकट नरसिंह राव (28 जून 1921मृत्यु- 23 दिसम्बर 2004)

28 जून 1921 को हैदराबाद, करीमनगर जिले के वंगरा गाँव में जन्में भारत के राजनेता एवं देश के दसवें प्रधानमंत्री पामुलापति वेंकट नरसिंह राव जी एक ऐसे शख्सियत थे जिन्होंने देश की कमान 1991 में तब संभाली जब हमारा देश आर्थिक संकट से जूझ रहा था।
कहा जाता है जब इन्हें प्रधानमंत्री पद देने का फैसला किया गया था उस समय नरसिम्हा राव जी राजनीति से सन्यास लेने का फैसला कर चुके थे ।
रोजर्स रिमूवल कंपनी का ट्रक उनकी किताबों के 45 कार्टन लेकर हैदराबाद रवाना हो चुका था और वे लोकसभा चुनाव में भी नहीं उतरे।
विनय सीतापति अपनी किताब ‘हाफ़ लायन- हाऊ पीवी नरसिम्हा राव ट्रांसफ़ॉर्म्ड इंडिया’ में लिखते हैं कि नरसिम्हा राव इस हद तक रिटायरमेंट मोड में चले गए थे कि उन्होंने दिल्ली के मशहूर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की सदस्यता के लिए आवेदन कर दिया था, ताकि अगर भविष्य में वो कभी कुछ दिनों के लिए दिल्ली आएं तो उन्हें रहने की दिक्कत न हो।
लेकिन एक अचानक घटी घटना ने हवा का रुख मोड़ दिया और नरसिम्हा राव जी जो जिम्मेदारियों से कभी मुंह न मोड़ने वाले वापस लौटे। वे दक्षिण भारत से प्रधानमंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति थे।
अपने सहयोगियों की सहायता से मुश्किल हालातों से गुजर रहे देश की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने जी-जान से जुट गए। रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे मनमोहन सिंह जी को वित्तमंत्री बना कर चुनौतियों का सामना करते हुए देश को एक नई दिशा देने सभी पूर्ववर्ती मंत्रियों के फैसलों को दरकिनार करते हुए उदारीकरण की नीति अपनाई। देश विकट आर्थिक संकट से बाहर आया।
तब नरसिम्हा राव जी भारत के “फादर ऑफ इंडियन इकॉनोमिक रिफॉर्म्स कहलाए।
1994 में जब मनमोहन सिंह जी को “यूरो मनी” ने सर्वश्रेष्ठ वित्तमंत्री के पुरस्कार से नवाजा तो उन्होंने इसका सारा श्रेय नरसिम्हा राव जी को दिया।
ऐसी बहुत सारी बातें हैं जो इनके व्यक्तित्व को खास बनाती है :

  • 10 भारतीय और 6 से अधिक विदेशी भाषाओं का ज्ञान।
  • 1937-38 के आसपास मात्र 17 वर्ष की आयु में
    निज़ाम के खिलाफ ‘वंदे मातरम आंदोलन” में शामिल हुए।
    *1951 में कांग्रेस में शामिल हुए।
    *1957-77 तक आंध्र प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे।
    *1971 में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
    *1972 में आंध्र प्रदेश में भूमि सुधार की शुरुआत की।
    *1991 में देश के दसवें प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
    *भारत के बाजारों को पूरी दुनिया के लिए खोल दिया।
  • आर्थिक सुधार के तहत “एल पी जी ” लिब्रलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन, ग्लोबलाइजेशन
    की नीति लागू किया।
    *’ भारतीय अर्थनीति में खुलेपन उनके प्रधानमंत्रित्व काल में ही आरम्भ हुआ।
    *उदारीकरण निजीकरण वैश्वीकरण के तहत
    औधौगिकीकरण की नीति अपनाई गई और लाइसेंस राज’ की समाप्ति की।
    *सरकारी संस्थाओं को घाटे से उबारने के लिए इन्होंने “निजीकरण” की पहल की।
    *सेक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ( सेबी ) और नेशनल स्टाॅक एक्सचेंज की शुरुआत भी इन्होंने ही की।
    *देश के विकास के लिए सांसद निधि की शुरुआत की।
  • दक्षिण पूर्वी देशों से मित्रता को बढ़ावा देने की शुरुआत “लुक ईस्ट” नीति के साथ की।
    *केंद्रीय मंत्री के रूप में एक लंबा राजनीतिक सफर, शिक्षा पर जोर, सीखने की प्रवृत्ति, सुदृढ़ नेतृत्व और ऐसे अनगिनत खुबियाँ इनकी पहचान हैं जो अविस्मरणीय हैं।
    99 वीं जयंती पर श्री पी वी नरसिम्हा राव जी को हमारी पूरी टीम की तरफ से शत् शत् नमन।

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