हिन्दी है दुनिया में चौथी सबसे अधिक बोले जानी वाली भाषा फिर भी हम भारतवासी इस बात से अनभिज्ञ इतर भाषाओं में प्रवाहित होने के लिए लालायित रहते हैं।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी की पंक्तियां याद आती है जो इस संदर्भ में लिखना ज़रूरी लग रहा है मुझे ___
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।
विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार।
सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार।
भावार्थ:
निज यानी अपनी भाषा से ही उन्नति संभव है, क्योंकि यही सारी उन्नतियों का मूलाधार है।
* मातृभाषा के ज्ञान के बिना हृदय की पीड़ा का निवारण संभव नहीं है।
* विभिन्न प्रकार की कलाएँ, असीमित शिक्षा तथा अनेक प्रकार का ज्ञान,
* सभी देशों से जरूर लेने चाहिये, परन्तु उनका प्रचार मातृभाषा के द्वारा ही करना चाहिये।

हिन्दी की महत्ता अब पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं रह गया है ।
नई पीढ़ी को इस कविता का शायद ही ज्ञान है।
अब भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी को महज़ हिन्दी दिवस में याद भर कर लिया जाता है। विडंबना ही कहेंगे कि अब हमें हमारी मातृभाषा को सहेजना और बढ़ावा देने की अपील और अदम्य कोशिश करनी पड़ रही है।
हम साल में एक बार हिन्दी दिवस पर हिन्दी की प्रशंसा और उसे बढ़ावा देने के लिए कुछ और छलावा भरी योजनायें बनाते हैं जो उसी दिन कार्यक्रम की समाप्ति के साथ ही दम तोड़ दिया करती हैं । योरोप के कई देश अंग्रेज़ी को नापसंद करते हैं । चीन के चेयरमैन भारत आते हैं तो चीनी बोलते हैं, हम चीन जाते हैं तो अंग्रेज़ी बोलते हैं । और भी अनेक देश जिन्हें अंग्रेजी बिल्कुल नहीं आती वे शान से अपनी मातृभाषा में ही बात करते हैं।

अधिकांश योरोपीय देशों में तो अंग्रेज़ी भाषा जानते ही नहीं हैं। फिर भारत में शिक्षा के माध्यम के लिए अंग्रेज़ी इतनी आवश्यक क्यों है? नहीं लगता कि हम भारतीय भाषाओं की सुनियोजित हत्या में पाप के सहभागी हैं! भाषा तो एक शरीर है जिसमें उस देश की संस्कृति आत्मा की तरह प्रवाह करती है । भाषा की मृत्यु संस्कृति की मृत्यु है, इसे हम भारतवासी उतनी ही अच्छी तरह जानते हैं जितनी अच्छी तरह योरोपीय देश जानते हैं ।
बेशक इतर भाषा बोलिए लेकिन अपनी भाषा के बलि चढ़ा कर नहीं।
इसलिए हिन्दी दिवस सिर्फ एक दिन मनाने की परंपरा तक सीमित ना करें बल्कि अपने जीवन में माँ के स्थान के बराबर मातृभाषा हिन्दी को भी स्थान दें ।
विश्व हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं सभी को 🦋🌻

-अपर्णा विश्वनाथ🍁

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