तन्हाई***

तन्हाई कब
तन्हा होती ⁉️
कुछ न कुछ
आस पास होता
हल्की-सी
बारिश की
फुहार
जब
गालों पे
दस्तक
दे जाती
बारिश साथ होती❗

तन्हाई कब……..
……………..⁉️
…….
फिज़ा में
केवड़े की
घुलती
खुशबू में
पानी में
तैरते
दीये में
कुछ
बीती यादों
के पुलिंदे
साथ होते❗

तन्हाई कब……..
………………⁉️
……
कड़वे
कहवे की
कुल्हड़
हाथ में
होती
मन में
उमड़ते
विचारों का
सैलाब होता
कही
अनकही
यादों की
तब
बारात
साथ होती❗

तन्हाई कब…….
……………..⁉️
…..
सुनसान
आंगन में
फैले
पलाश के
सूखे पत्तों
की
खडखडाहट
दीवारों के
सन्नाटें में
झींगुर की
आवाजें
साथ होती ❗

तन्हाई कब……
……………..⁉️
……
सुनसान
लंबी
राहों
पर
कुछ
दरख़्त
की शाख
चिलचिलाती
धूप में
छांव देती
तब
ठंडे
एहसास
साथ होते❗

तन्हाई कब
तन्हा छोड़ती ⁉️
कुछ न कुछ
आस पास होता❗

-अपर्णा 🍁

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